पहले अनजान बने अफसर अब मामला लटका रहे, दुबड़ समिति का प्रकरण

धर्म/समाज/संस्था

चंपावत जिले की दुबड़ साधन सहकारी समिति में हुई 64 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता की एसआईटी जांच की मांग तेज हो गई है। किसान चार मार्ग से आंदोलन पर हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। किसान प्रकरण की एसआईटी जांच के साथ ही उनने नाम दर्ज ऋण बकाया हटाने व फसल बीमा का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। उत्तराखंड किसान संगठन के बैनर तले सोमवार को केशव भट्ट, त्रिभुवन सकलानी, खष्टी बल्लभ सकलानी, बाली राम, काशी राम, हयात सिंह, खुशाल सिंह बोहरा क्रमिक अनशन पर बैठे।

आंदोलन के संयोजक नरेंद्र उत्तराखंडी ने कहा कि किसानों को छोटे-छोटे ऋण देकर उबारने व छोटी बचत के लिए प्रेरित करने का काम जिस समिति सचिव पर था, उसी ने लाखों का गबन कर दिया। गबन का खेल 2010 से चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहे। आडिट को आने वाली टीम भी घपले का साझेदार बनकर प्रोत्साहित करते रही। एक वर्ष पहले प्रकरण पकड़ में आने के बाद भी विभागीय अधिकारी जांच के नाम पर मामले को लटकाए हुए हैं। समिति सचिव निलंबित है, लेकिन समिति के धन की वसूली के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे अधिकारियों की मंशा पर प्रश्न उठता है। नरेंद्र ने कहा कि किसान अपने हक व खून पसीने की कमाई वापस दिलाने के लिए धरने पर डटे रहेंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन उग्र किया जाएगा। यहां लछ राम, केशव राम, भुवन मिश्रा, तपेश्वरी देवी, कृष्ण राम, पुष्पा देवी, निर्मला देवी, दयाकिशन शर्मा, धनी राम, कमल जोशी, दुर्गा दत्त आदि शामिल रहे।

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