उत्तराखंड सरकार ने हाई कोर्ट में शपथ पत्र देते हुए कहा है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जुलाई में कराए जाएंगे।सरकार ने यह भी दावा किया है कि उसके स्तर से पंचायती चुनाव की तैयारी भी शुरू हो गई है। अब सवाल यह है कि जुलाई में जब मानसून अपने चरम पर होता है। नदी-नाले उफना जाते हैं। गाड़-गधेरे शोर कर रहे होते हैं और जगह-जगह रास्ते, सड़कें बंद होने से आवागमन प्रभावित होता है। ऐसे समय में सरकार चुनाव कैसे कर पाएगी।
अधिनियम में संशोधन को राज्यपाल की मंजूरी
इस बीच पंचायतों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण नए सिरे से करने के लिए पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन अध्यादेश को राजभवन ने हरी झंडी दे दी है।पंचायतीराज सचिव चंद्रेश कुमार यादव के अनुसार पंचायतों में इसी माह यानी मई में ही ओबीसी आरक्षण तय कर इसकी अंतिम अधिसूचना जारी करने के साथ ही सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी जाएगी।
नवंबर 2024 में खत्म हो चुका कार्यकाल
हरिद्वार जिले में पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश के साथ होते हैं। वहां पिछले चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। शेष 12 जिलों में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर आखिर में खत्म होने के बाद जब चुनाव की स्थिति नहीं बन पाई तो इन्हें प्रशासकों के हवाले कर दिया गया था। इस बीच सरकार ने पंचायत चुनाव के दृष्टिगत पंचायतों का परिसीमन, निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण, मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण संबंधी कार्य पूर्ण किए।
क्या है ओबीसी आरक्षण का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पंचायतों में ओबीसी (अदर बैकवर्ड क्लास) आरक्षण का नए सिरे से निर्धारण होना है। इस सिलसिले में गठित एकल समर्पित आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन के दृष्टिगत अध्यादेश राजभवन भेजा था। इसे राजभवन ने मंजूरी दे दी है।
प्रशासक के कार्यकाल का क्या होगा?
पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल 27 मई व 31 मई को खत्म होना है। इससे पहले यदि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाती है तो प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने की नौबत नहीं आएगी। यदि अधिसूचना जारी नहीं हुई तो कार्यकाल बढ़ाने के लिए पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन अध्यादेश लाना होगा।
