एक दिन बाद प्रबोधिनी एकादशी है। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में इसे बुढ़ी दिवाली और गढ़वाल में इग्यास के रूप में मनाया जाता है। बढ़ी दिवाली को कुमाऊं में बैलों की पूजा की जाती है। खेत जोत से पहले उसे गुड़, जौ, चना आदि खिलाकर च्यूड़े पूजे जाते हैं। कुछ अराजत तत्वों ने बागेश्वर के कांडा तहसील के धनीगांव के जंगल में दो बैलों के पैर तथा मुंह बांधकर छोड़ दिया।
घास लेने जंगल गए एक ग्रामीण ने इसका फोटो वायरल किया है। प्रशाासन उनका उपचार करा रहा है।माणा गांव के 34 वर्ष के चंचल सिंह बोरा घास लेने जंगल गए थे। उन्हें जंगल में दो बैल दिखाई दिए। उनके मुंह और पैर बांधे थे। उन्होंने बैलों को रस्सी से मुक्त करने का प्रयास किया, लेकिन जानवरों ने खोलने नहीं दिया। सोमवार की सुबह ग्रामीण जंगल गए। उन्होंने बताया कि जिस जगह तारों से पैर बांधे हैं, उस स्थान पर सड़न आ रही है। बैलों को जंगल में मरने के लिए छोड़ गया है। चंचल ने इसका फोटो फेसबुक पर शेयर किया। प्रशासन से पशु क्रूरता के तहत कार्रवाई की मांग की है। डीएमएम अनुराग आर्य ने बताया कि तहसीलदार व पशुपालन विभाग के पशुधन प्रसार अधिकारी को मौके पर हैं। वह बैलों का उपचार कर रहे हैं।





