उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में प्रदेश स्तर पर छठा स्थान पाने वाले सागर पांडेय ने खुद की मेहनत के साथ पिता के संघर्ष को साकार किया है। बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए परिवार ने गांव छोड़ दिया। अपना घर छाेड़कर किराये के कमरे में रहने लगे। खेती से मुंह मोड़ बाजार से महंगी साग-सब्जी खरीदना शुरू कर दिया। गाय-भैंस पालन कर दुग्ध उत्पादित करना छोड़ पैकेट बंद दूध लेना शुरू कर दिया। आज जब बेटे ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में 98.0 प्रतिशत अंक लाकर चंपावत जिले में पहना स्थान पाया तो मां और पिता अपना दुख व संघर्ष भूल गए। खुशी के मारे दोनों की आंखें छलक पड़ी और बेटे को गले से लगा लिया।
विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कालेज चंपावत के छात्र सागर पांडेय ने प्रदेश की वरीयता सूची में हाईस्कूल में छठा स्थान प्राप्त किया है। सागर ने हिंदी व विज्ञान में पूरे 100 अंक प्राप्त किए हैं। संस्कृत में 99, सामाजिक विज्ञान में 98, गणित में 93 व अंग्रेजी में 88 अंक हैं। सागर का गांव नीड़ चंपावत जिला मुख्यालय से 32 किमी दूर है। पिता भुवन चंद्र पांडेय टैक्सी ड्राइवर हैं। मां हीरा पांडेय गृहिणी हैं। भुवन पांडेय के दो बेटियां व एक बेटा है। बच्चों की पढ़ाई के लिए आठ वर्ष पहले परिवार चंपावत आ गया। छोटे से कमरे में गुजर करने लगे। वर्तमान में परिवार कनलगांव में रहकर बच्चों की पढ़ाई कराता है। सागर ने स्कूल में पढ़ाई करने के साथ स्वाध्याय पर जोर दिया। प्रतिदिन चार से छह घंटे केंद्रित होकर पढ़ाई की। बिना कोचिंग के प्रदेश की वरीयता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर जिले का गौरव बढ़ाया है। ड्राइविंग के लिए घर से बाहर गए पिता को जब बेटे के मेरिट में आने की जानकारी मिली तो वह अपने संघर्ष के दिनों को याद करने लगे। सागर की दादी गांव में रहती हैं। पोते की सफलता से वह भी गदगद हैं। सागर की बड़ी बहन रेनुका ने बीए किया है। दूसरी दीदी किरन लोहाघाट से फार्मेसी कर रही हैं।





