सत्र न्यायाधीश ने 17 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले में अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास व 2.10 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियुक्त ने मोबाइल व रुपये के लालच में पूर्णागिरि धाम के दर्शनों को आए युवक की हत्या की थी। रुद्रपुर आदर्श कालोनी निवासी धर्मवीर सिंह ने मई 2017 में टनकपुर थाने में तहरीर देकर कहा था उसके दो पुत्र, परिवार समेत कुछ अन्य लोग बस से पूर्णागिरि दर्शनों को आए थे। छोटा बेटा संजीव कुमार भैरव मंदिर के पास भोजन करने के बाद आगे चला गया था। दर्शन के बाद सभी नीचे आ जाते हैं लेकिन संजीव का पता नहीं चलता। उसके दोनों मोबाइल नंबर बंद आते हैं। सीसीटीवी में उसे दर्शनों को जाते-लौटते देखा जाता है।
सर्विलांस की मदद से खुला मामला
सर्विलांस से दोनों मोबाइल पर कोई अन्य नंबर चलते मिले। प्रकरण में अभियुक्त 34 वर्षीय प्रीतम सिंह बोरा निवासी ठूलकोट, उप तहसील मंच तालमी, जिला चंपावत की संलिप्तता सामने आई। अभियोजन के अनुसार अभियुक्त हनुमान चट्टी के पास श्रद्धालुओं को खीरे बेचता था। मृतक संजीव कुमार ने उससे पूर्णागिरि मंदिर से नीचे उतरने के लिए शार्टकट रास्ता पूछा था। संजीव के पास दो मोबाइल देखकर अभियुक्त को लालच आ गया। शार्टकट रास्ता दिखाने के लिए वह उसे दुर्गम पहाड़ी की तरफ ले गया और मौका देखकर धक्का दे दिया। बाद में पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। एक मोबाइल को उसने टनकपुर में मोबाइल की दुकान चलाने वाले को एक हजार व दूसरे को चल्थी निवासी गिरधर को 600 रुपये में बेच दिया था।
एक साल बाद मिला था शव
अभियुक्त प्रीतम सिंह बोरा चार सितंबर 2018 को गिरफ्तार होता है। आठ सितंबर को उसकी निशानदेही पर हनुमान चट्टी से चार किमी नीचे गधेरे में रेत से दबा संजीव का कंकाल मिलता है। 22 हड्डी व कपड़े आदि से डीएनए जांच से संजीव के होने की पुष्टि होती है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने बताया कि प्रकरण में 16 गवाह व 51 साक्ष्य पेश किए गए। अनुज कुमार संगल की कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी ठहराया।
