दुष्कर्मी भाई को 25 वर्ष की जेल, प्रकरण छुपाने के लिए निजी अस्पताल पर FIR

न्यायालय

विशेष सत्र न्यायालय ने नाबालिग बहन से दुष्कर्म करने वाले भाई को 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। लैंगिक हिंसा से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत अभियुक्त पर दो लाख का अर्थदंड भी लगा है। अर्थदंड न देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
टनकपुर थाना क्षेत्र की 17 वर्षीय पीड़िता ने जनवरी 2024 को निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। प्रसव से 10 दिन पहले पेट में दर्द होने पर पीड़िता को निजी अस्पताल में दिखाया गया था। डर व लोकलाज से पीड़िता की मां ने किसी को जानकारी नहीं दी। प्रसव होने के बाद पिता ने प्राथमिकी दर्ज करवाई। पीड़िता ने कहना था कि बड़े भाई ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए। डीएनए रिपोर्ट में बच्चे के अभियुक्त के होने की पुष्टि हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोप सिद्ध करने के लिए सात गवाह व 27 साक्ष्य प्रस्तुत किए। विशेष सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल ने 23 वर्षीय अभियुक्त को दोषी ठहराया। कोर्ट ने निर्णय में लिखा- ‘तुझ पर उठी हर निगाह का अस्तित्व मैं मिटा दूंगा, जब भी पडे़गी तुझे जरूरत तेरे साथ खड़ा रहूंगा।’ आगे लिखा भाई-बहन का रिश्ता ऐसा है, जिसे न अल्फाज की जरूरत है, न किसी माध्यम की। अभियुक्त के कृत्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

तुषार अस्पताल प्रबंधन पर चलेगा मुकदमा
अभियाेजन पक्ष की अधिवक्ता वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी तनुजा वर्मा ने बताया कि अवयस्क व अविवाहित पीड़िता के गर्भवती होने की सूचना पुलिस को न देने पर टनकपुर के तुषार अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय भी सुनाया। निजी अस्पताल प्रबंधन पर पोक्सो एक्ट की धारा-19 में मामला चलेगा। पुलिस को जांच के बाद रिपोर्ट न्यायालय को देनी होगी।

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