साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। नया मामला अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा विकासखंड में सामने आया है। यहां एक व्यक्ति को 30 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर सात लाख ठग लिए। ठगी करने वालों ने खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। फिर सीबीआइ के फर्जी अधिकारी से बात कराकर ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित जीवन सिंह मेहता निवासी ग्राम बर्गला निवासी ने पुलिस केा तहरीर देकर कहा है कि 11 जनवरी को उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप काल आई। काल करने वाले ने बताया कि उनके विरुद्ध अशोक गुप्ता मनी लान्ड्रिंग केस मामले में शिकायत हुई है। ठग ने दिल्ली क्राइम ब्रांच के अधिकारी राकेश कुमार बात कराने की बात कही। राकेश कुमार ने बताया कि अशोक गुप्ता ने एचडीएफसी बैंक में उनके नाम से खाता खोला है। जिस बैंक खाते में 6.38 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ है। बैंक खाते से जीवन मेहता का आधार लिंक होने की बात कही। कहा गया कि अशोक गुप्ता मनी लॉन्ड्रिंग में 328 लोग शामिल हैं। मुख्य आरोपी अशोक गुप्ता सहित 116 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। राकेश कुमार ने डर दिखाते हुए सीबीआइ आफिसर मोहित हुड्डा से बात कराई। मोहित हुड्डा ने पीड़ित के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही। उससे सात लाख रुपये बैंक खाते में डलवा लिए। पीड़ित डेढ़ माह से अधिक समय बात पुलिस से शिकायत करने पहुंचा है।
डिजिटल अरेस्ट का प्रविधान ही नहीं: एसएसपी
ऐसे मामलों में पुलिस का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज है ही नहीं। व्यक्ति डर के मारे ठगों के झांसे में आ जाते हैं। एसएसपी अल्मोड़ा देवेंद्र पींचा ने बताया कि कोई भी अधिकारी इस तरह से अरेस्ट नहीं कर सकता। ऐसे समय में धैर्य के साथ सोचने, समझने की जरूरत होती है। किसी के बहकावे में आकर जमा पूंजी दूसरे खाते में नहीं डालनी चाहिए। फिर भी ठगी हो जाती है तो तत्काल शिकायत करनी चाहिए। शिकायत जितनी जल्दी हो धनराशि वापस पाने की उतनी ही अधिक संभावना रहती है। देर होने से कई बार धनराशि वापस नहीं आ पाती।




