बुनकरी को पहचान दिलाने का सम्मान: प्रशिक्षक व डिजाइनर लक्ष्मण गैलाकोटी को उत्तराखंड शिल्प रत्न पुरस्कार, सीएम ने सौंपा ₹1 लाख का चेक

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बुनकरी के क्षेत्र में काम करते हुए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाले लक्ष्मण सिंह गैलाकोटी को उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के उद्योग निदेशालय की ओर से 11वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देहरादून में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैलाकोटी को सम्मानित किया। शाल ओढाने के साथ उन्हें प्रशस्तिपत्र और एक लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई। पुरस्कार पाने के बाद गैलाकोटी ने कहा वह अधिक ऊर्जावान होकर स्थानीय उत्पादों को विदेश तक पहुंचाने का काम करेंगे। समारोह में कई गणमान्यजनों की उपस्थिति रही।

स्कूली शिक्षा के बाद बुनकरी से जुड़े
अल्मोड़ा जिले के चौमू क्षेत्र के कन्युड़ा गांव निवासी 50 वर्षीय लक्ष्मण सिंह गैलाकोटी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद 1993 में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से बुनकरी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। शुरुआत में दूसरी संस्थाओं से जुड़कर बुनकरी का काम करते रहे। 2006 से 2013 तक अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास बैंक (आईफैड) द्वारा वित्त पोषित उत्तराखंड ग्रामीण आजीविका परियोजना से जुड़कर महिलाओं को प्रशिक्षण देने का काम किया। 2015 से अल्मोड़ा जिले के पेटशाल में देव महिमा हैंडलूम कुमाऊं विमेंस नाम से खुद का स्टार्टअप शुरू किया।

छोटे सेंटर के माध्यम से बड़ा संदेश
लक्ष्मण सिंह गैलाकोटी महिला सशक्तिकरण का बड़ा संदेश दे रहे हैं। केंद्र में महिलाएं और युवतियां काम करती हैं। यहां तैयार उत्पाद स्थानीय स्तर पर बिकने के साथ देशभर में लगने वाले हथकरघा मेलों में बिक्री के लिए उपलब्ध रहते हैं।

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