कुमाउनी साहित्यिक सेवा के लिए ठकुराठी पिता-पुत्र सम्मानित, सीएम धामी ने दिया डेढ़ लाख का चेक

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उत्तराखंड भाषा संस्थान ने दो कुमाउनी साहित्यकारों को उनकी साहित्यिक सेवा के लिए सम्मानित किया है। देहरादून में आयोजित अलंकरण समारोह में मूल रूप से ग्राम बड़ालू जिला पिथौरागढ़ व वर्तमान में अल्मोड़ा में रह रहे साहित्यकार महेंद्र ठकुराठी को उनके कुमाउनी कहानी संग्रह ‘हिमुलि परफाम’ के लिए उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान के तहत बहादुर बोरा ‘श्रीबंधु’ पुरस्कार दिया गया है। डा. पवनेश ठकुराठी को नवोदित उदीयमान सम्मान के तहत गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ पुरस्कार से दिया गया। डा. पवनेश, महेंद्र ठकुराठी के पुत्र हैं। सीएम पुष्कर धामी, भाषा मंत्री सुबोध उनियाल व संस्थान की निदेशक स्वाति भदौरिया ने दोनों को प्रतीक चिह्न व सम्मान पत्र दिया। महेंद्र ठकुराठी को एक लाख व पवनेश को पचास हजार रुपये का चेक दिया गया।
दोनों पिता-पुत्र कुमाउनी भाषा साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अब तक दोनों की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पूर्व में शिक्षक रहे महेन्द्र ठकुराठी अल्मोड़ा से प्रकाशित ‘पहरू’ कुमाउनी मासिक पत्रिका के संपादकीय विभाग में रह चुके हैं। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। डॉ. पवनेश ठकुराठी अल्मोड़ा के जीआईसी नाई में प्रवक्ता के पद पर रहते हुए साहित्य सेवा कर रहे हैं। पिता-पुत्र को एक साथ प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर ‘पहरू’ के पूर्व संपादक डा. हयात सिंह रावत, अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. जगत सिंह बिष्ट, ‘पहरू’ संपादक नीरज पंत, साहित्यकार डा. आनंदी जोशी, प्रो. प्रीति आर्या, डा. नीरज जोशी, प्रकाश पुनेठा, मंजू पांडेय ‘उदिता’, अमृता पांडेय, हेम पंत, जमन सिंह बिष्ट, दिनेश भट्ट, शिक्षक नेता महेश जोशी ने खुशी जताई है।

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