रंग कारवां का वार्षिकोत्सव: नाटक से सामाजिक चेतना, रंगारंग प्रस्तुति से बिखेरी सतरंगी छटा

धर्म/समाज/संस्था

रूढ़ीवादी सोच के साथ समाज आगे नहीं बढ़ सकता। तरक्की और सफलता के नए आयाम स्थापित करने के लिए रूढ़ीवादिता व लिंगभेद जैसी मानसिकता को भुलाकर काम करना होगा। जगदीश चंद्र माथुर लिखित ‘रीढ़ की हड्डी’ नामक कहानी पर आधारित एकल नाटक ‘रीढ़ विहीन’ का कुमाऊंनी भाषा में मंचन किया गया। दिल्ली से आई मंजिल ड्रामेबाज टीम की प्रस्तुति ने दर्शकों को गुदगुदाने के साथ सामाजिक कुरीतियों पर तंज किया। नाटक के अंत ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
रंग कारवां संस्था के वार्षिकोत्सव पर गोरलचौड़ स्थित आडिटोरियम में आयोजित समारोह की शुरुआत विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, प्रमुख प्रशासक रेखा देवी, डीडीओ डीएस दिगारी, रेड क्रांस समिति अध्यक्ष राजेंद्र गहतोड़ी ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। उत्तराखंड मेरी मातृभूमि से, मातृ भूमि मेरी पितृ भूमि.. गीत से शुरुआत हुई। वंदना ने संस्था की कार्यों की जानकारी दी। दृष्टिबाधित रानी नाम की बच्ची ने अपने संघर्ष व सपनों को सभी ने सामने रखकर भावुक कर दिया। पाप अप लाइब्रेरी के बच्चों ने कठपुतली शो व बैंगनी जोजो नाम की किताब पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। कल्पना के तैयार चित्रों की प्रदर्शनी लगी। नीरज व राहुल ने चुटकुलों से गुदगुदाया। दर्शकों को खूब हंसाया। यहां साहित्यकार प्रकाश चंद्र जोशी शूल, व्यापार संघ अध्यक्ष विकास साह, आंदोलनकारी भूपेंद्र देव, हिमांशु जोशी, नवीन पंत, श्यामश्रवा आर्य, अंकित, किरण, तरुण, पंकज, निर्मला, लता, सचिन, नीरज, ज्योति, हिमानी, संगीता, मनीषा, मोनू, आदित्य, रवि, अंजली, शिल्पा, राहुल, किरण आदि मौजूद रहे।

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